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आरएसएस के विशाल द्विधारा पथ संचलन में 1500 से अधिक स्वयंसेवकों ने मिलाए कदम

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन में घोष की ताल पर मिले हजारों कदम, भगत सिंह स्टेडियम में होने वाले बौद्धिक कार्यक्रम को प्रांत प्रचारक ने किया संबोधित

जालोर. जालोर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जालोर नगर द्वारा विशाल द्विधारा पथ संचलन एवम मकर संक्रांति उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रान्त प्रचारक योगेन्द्र कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

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उन्होंने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद एवं सुभाष चंद्र बोस का उल्लेख करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में हिंदू होने के भाव में कमी या उदासीनता ही सबसे समाज कमजोर प्रतीत होने लगा। हमारा समाज संपन्न होने के बावजूद बाहरी लोगों से संघर्ष करना पड़ा, जब जब समाज कमजोर हुआ। तब सब बाहरी लोगों ने हमारी कमजोरी का लाभ उठाकर शासन किया, आज देश का हिंदू समाज जागृत हो रहा है।

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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने विजयादशमी के पावन अवसर पर की थी। संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य देश की सोई हुई चेतना को जगाना, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों का निर्माण, देश में एकता व अखंडता की भावना जगाना था। आज संघ विश्व का सबसे बड़ा संगठन है जो देश की संस्कृति, एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण बनाये रखने के साथ साथ भारत को जगतगुरु बनाने की लिए कटिबद्ध है. संघ भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान, बौद्धिक सम्पदा के संवर्धन का कार्य कर रहा है, उन्होंने आह्वान किया कि आज समय की यही पुकार है कि जाति, वर्ग, भाषा के बंधन को तोड़ते हुए हम सभी देश एवं समाज के लिए संगठित होकर कार्य करें।

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उन्होंने कहा कि सभी का लक्ष्य होना चाहिए कि देश मेरा, मैं देश के लिए. संघ की देश के लिए परिकल्पना एक जीते जागते राष्ट्र की है, जिसे हम भारत माता के नाम से जानते हैं और हमारा हर कार्य इस अनुभूति के साथ होना चाहिए कि मैं जो भी करूँ वह मेरी भारत माता, मेरे देश, मेरे समाज की लिए कर रहा हूँ. देश एवं समाज के लिए किया जाने वाला कार्य ईश्वरीय कार्य है और इसे करने में गर्व का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व समरसता का पर्व है, हम शक्ति के उपासक हैं. हम अपने पुरुषार्थ में विश्वास रखते हैं. आज हमें मात्र अपने पुरुषार्थ को जगाना है और अपने विश्वास को जागृत करना है.

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1500 से अधिक स्वयंसेवकों ने निकाला पथ संचलन

कार्यक्रम में जालोर नगर के 1500 से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित थे। कार्यक्रम में सभी आयुवर्ग के स्वयंसेवक उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रबंधन एवं संचालन पूर्णतया अनुशासन के साथ किया गया। घोष (बैंड) के स्वयंसेवकों द्वारा देशभक्ति गीतों की मनोहर धुन राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत वातावरण का निर्माण कर रही थी

रविवार को जालौर नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा द्विधारा पथ संचलन का आयोजन हुआ जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ने संघ की पूर्ण गणवेश में भाग लिया घोष की धुन पर स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाते हुए नगर के प्रमुख मार्गों पर संचलन किया नगर कार्यवाह गोविंद कुमार ने बताया कि एक साथ दो स्थानों से रवाना हुआ संचलन , जोशी सर्किल पर अद्भुत संगम देखने को मिला। पथ संचलन ठीक अपराह्न 4 बजे दो अलग अलग स्थानों से एक साथ रवाना होकर हरिदेव जोशी सर्कल पर ठीक 4.30 बजे संगम हुआ ।

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पहला संचलन रामदेव कॉलोनी से रवाना होकर हनुमान जी मंदिर , आशापूर्णा कॉलोनी के आगे, देवनारायण सर्कल, आदर्श विद्या मंदिर स्कूल, सूरजपोल पूरा मोहल्ला, गांधी चौक होते हुए पीपली चौक जोशी सर्कल पहुंच गया। वहीं दूसरा पथ संचलन गोड़ीजी मंदिर, वीरम देव चबूतरा, सरस्वती विद्या मंदिर, अमर गेस्ट हाउस, सामतिपुरा रोड, गायत्री शक्तिपीठ, विष्णु ट्रांसपोर्ट, गुप्ता गोदाम, सेवा बस्ती श्री हनुमान जी का मंदिर होते हुए जोशी सर्कल पहुंचा। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत जालौर में निविदा राम पथ संचलन का राष्ट्रीय सेविका समिति राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय किसान संघ लघु उद्योग भारती विद्या भारती मजदूर संघ टैक्सी यूनियन सहित अनेक संगठनों ने स्वागत किया।जलंधर नाथ अखाड़े के पूज्य ईश्वर नाथ महाराज ने कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में हुआ यष्टि का विशेष प्रदर्शन भारतीय युद्ध कला का एक विशेष उपकरण व्यष्टि के माध्यम से कार्यक्रम में विशेष शारीरिक कार्यक्रम भी किया गया। जालौर में निकलने वाले इस पथ संचलन को लेकर कार्यकर्ताओं में अत्यंत उत्साह और उमंग का वातावरण बना।

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घोष में बजी मधुर धुन

संघ के पथ संचलन में बजने वाले घोष की खास बात यह होती है कि विभिन्न वाद्य यंत्रों पर विशुद्ध भारतीय राग पर आधारित धुन तैयार कर बजायी जाती है।

आणक पर किरण, श्रीराम, भूप, सोनभद्र, अजय,उदय, चेतक,शिवरंजनी, मीरा, गायत्री, प्रभात इत्यदि धुन बजी वहीं बिगुल पर किरण, श्रीराम, भूप, सोनभद्र, अजय, उदय, चेतक, शिवरंजनी का वादन हुआ। इसके अलावा घोष दल में प्रणव, घंटी, वेणु, वंशी और श्रृंग वाद्य का भी वादन हुआ।

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