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सही ऐतिहासिक तथ्य नई पीढ़ी के सामने पेश करें: केंद्रीय गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि अंग्रेज भारत छोड़ गए है और अब समय आ गया है कि इतिहास को भारतीय परिप्रेक्ष्य में लिखा जाए। औपनिवेशिक अतीत के सभी अवशेषों से छुटकारा पाने के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के उद्देश्य के अनुरूप, इतिहास को औपनिवेशिक अतीत से मुक्त करना सबसे महत्त्वपूर्ण है। वीर सावरकर ने पहली बार 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता का पहला युद्ध बताकर इसका प्रयास किया था।

एक पुस्तक के विमोचन प्रसंग में, अमित शाह ने कहा कि “अहिंसक संघर्ष” ने भारत की स्वतंत्रता में बहुत योगदान दिया था, लेकिन अब, यह कहना उचित नहीं है कि दूसरों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। शाह ने कहा, ”सशस्त्र क्रांति की समानांतर धारा न चलती तो आजादी मिलने में कई दशक और लग जाते। आज जब मैं कर्तव्यपथ पर चलता हूं, उस पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति देखता हूं तो मुझे बहुत संतोष होता है।”

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अमित शाह की यह टिप्पणी संजीव सान्याल की पुस्तक – “रेवोल्यूशनरीज, द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया ओन इट्स फ्रीडम” के विमोचन के अवसर पर आई है। अमित शाह ने कहा कि “द अदर स्टोरी” शब्द किताब का सारांश है। स्वतंत्रता की वार्ता में एक वर्णन (परिप्रेक्ष्य) जनता के बीच वर्षों से स्थापित है। यह इतिहास लेखन और शिक्षण द्वारा लोगों पर लादा गया दृष्टिकोण है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष की कोई भूमिका नहीं है, या यह इतिहास का हिस्सा नहीं है। यह इतिहास का हिस्सा है और इसका बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन अहिंसक आंदोलन हो या सशस्त्र क्रांति, दोनों की नींव 1857 की क्रांति में थी और यह सरकार के साथ-साथ इतिहासकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे सही ऐतिहासिक तथ्यों को नई पीढ़ी के सामने पेश करें।

गृह मंत्री ने कहा, अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया लेकिन उनके चश्मे से इतिहास लिखा गया। यह भ्रम अब भी कायम है। लोग कहते हैं कि इतिहास को आज तक विभिन्न कारणों से तोड़ा-मरोड़ा गया है, लेकिन अब हमें इसे ठीक से लिखने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास को उग्रवादी बनाम नरमपंथी की धारा से हटाकर यथार्थवादी बनाना होगा। इस दावे को खारिज करते हुए कि मुगलों ने 200 से अधिक वर्षों तक भारत पर शासन किया, अमित शाह ने कहा, “जब भी हमें बताया जाता है कि मुगल पहले साम्राज्य थे, उन्होंने इस देश पर 200 से अधिक वर्षों तक शासन किया, लेकिन ऐसा नहीं है! अन्य साम्राज्य भी रहे हैं जिन्होंने 200 से अधिक वर्षों तक भारत पर शासन किया।”

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