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नए आपराधिक कानूनों में न्याय की अवधारणा, पीड़ित केन्द्रित सोच तथा त्वरित न्याय के सिद्धांत पर बल

जालोर. देशभर में 1 जुलाई से नवीन भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हुए। इन नए कानूनों में न्याय की अवधारणा, पीड़ित केन्द्रित सोच तथा त्वरित न्याय के सिद्धांत पर बल दिया गया है।

नए कानूनों में महिलाओं, बच्चों तथा पीड़ितों पर विशेष ध्यान

नए कानूनों में पीड़ित को जल्द न्याय उपलब्ध कराने और दोषी के स्थान पर पुनर्वास की भावना को प्रधानता दी गई है। साथ ही, महिलाओं, बच्चों तथा ग्रामीणों के हितों को बढ़ावा देने के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इन नए आपराधिक कानूनों में लिंग निरपेक्ष शब्दों द्वारा लैंगिक समानता को बढ़ावा तथा मानसिक विमंदितों के प्रति बौद्धिक विकलांगता जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है।

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नियत समय में न्याय मिलने के प्रावधान शामिल

नवीन आपराधिक विधि में आपराधिक मामले के महत्वपूर्ण चरणों को नियत समय-सीमा में बांधा गया है। नए कानूनों में परिवादी को 90 दिन होने पर मुकदमें की प्रगति से पुलिस को अवगत कराना, प्राथमिक जांच को 14 दिन में सम्पन्न करना, बलात्कार संबंधी मेडिकल रिपोर्ट 7 दिन में प्रदान करना, न्यायालय द्वारा पहली सुनवाई के 60 दिन में आरोप तय करना और विचारण पूरा होने के 45 दिन में निर्णय देने जैसे प्रावधान शामिल हैं, जिससे पीड़ित को त्वरित न्याय मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में छोटे-मोटे अपराधों के लिए दंड के स्थान पर सामुदायिक सेवा, ई-चालान, ई-समन जैसे प्रावधान, मॉब लिंचिंग को परिभाषित, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, राजद्रोह के कानूनी प्रावधान को समाप्त कर देशद्रोह को स्थान देना जैसे प्रावधानों से देश में न्याय और कानून के शासन को बल मिलेगा।

समय पर न्याय

 समय-सीमा निर्धारित (हमारा प्रयास रहेगा कि 3 साल में मिल जाये न्याय)

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 तारीख पर तारीख से मिलेगी मुक्ति

 35 सेक्शनों में टाइमलाइन जोड़ी गई

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 इलेक्ट्रोनिक माध्यम से शिकायत देने पर 3 दिन में एफआईआर दर्ज

 यौन उत्पीड़न में जाँच रिपोर्ट 7 दिन के भीतर भेजनी होगी।

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 पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय होंगे

 घोषित अपराधियों के खिलाफ अनुपस्थिति की स्थिति में 90 दिनों के भीतर मुकदमा

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 आपराधिक मामलों में मुकदमे की समाप्ति के 45 दिनों के अंदर निर्णय देना।

*नए आपराधिक कानून ‘‘दंड नहीं, न्याय केन्द्रित’’*

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 सामुदायिक सजा : छोटे अपराधों में

 भारतीय न्याय दर्शन के अनुरूप

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 5000 रूपए से कम मूल्य की चोरी पर कम्युनिटी सर्विसेज का प्रावधान।

 6 अपराधों में कम्युनिटी सर्विसेज को समाहित किया गया।

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महिलाओं और बच्चों के अपराध

 प्राथमिकता : महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध (पहले खजाने की लूट थी)

 बीएनएस में ‘महिलाओं व बच्चों के प्रति अपराध’ पर नया अध्याय

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 महिलाओं व बच्चों के अपराध से संबंधित 35 धाराएँ हैं जिनमें लगभग 13 नए प्रावधान है और बाकी में कुछ संशोधन।

 गैंगरेप-20 लाख की सजा/आजीवन कारावास

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 नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार : मौत की सजा/आजीवन कारावास

 झूठा वादा/पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाना अब अपराध है।

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 पीड़िता का बयान उसके आवास पर महिला अधिकारी के सामने ही रिकॉर्ड

 पीड़िता के अभिभावककी उपस्थिति में होगा बयान दर्ज

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तकनीक का उपयोग

 विश्व की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली बनानी है।

 50 साल तक आने वाली सभी आधुनिक तकनीक इसमें समाहिक हो सकेंगी।

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 कम्प्यूटराइजेशन : पुलिस इन्वेस्टीगेशन से लेकर कोर्ट तक की प्रक्रिया

 ई-रिकॉर्ड्स

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 जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर, चार्जशीट डिजिटल होगी

 90 दिन में मिलेगी पीड़ित को जानकारी

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 फोरेंसिक अनिवार्य : 7 साल या अधिक की सजा के मामलों में

 साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग : जाँच-पड़ताल में साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग को अनुमति

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 वीडियोग्राफी अनिवार्य : पुलिस सर्वे की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी

 ई-बयान : बलात्कार पीड़िता के लिए ई-बयान

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 कोर्ट में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की जाएगी।

 ई-पेशी : गवाहों, आरोपियों, विशेषज्ञों और पीड़ितों को इलेक्ट्रोनिक माध्यम से पेशी।

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फॉरेंसिक को बढ़ावा

 फॉरेंसिंग अनिवार्य : 7 वर्ष या अधिक की सजा वाले सभी अपराध।

 इन्वेस्टीगेशन में साइंटिफिक पद्धति को बढ़ावा।

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 कन्विक्शन रेट को 90 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य

 सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में फॉरेंसिंक अनिवार्य

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 मैनपावर के लिए राज्यों में एफएसयू शुरू करना

 फॉरेंसिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए जगह-जगह लैब बनाना

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मॉब लिंचिंग

 पहली बार मॉब लिंचिंग को परिभाषित किया गया

 नस्ल/जाति/समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा आदि से प्रेरित हत्या/गंभीर चोट मॉक लिंचिंग

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 7 वर्ष की कैद का प्रावधान

 स्थायी विकलांगता : 10 वर्ष की सजा/आजीवन कारावास

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विक्टिम सेंट्रिक कानून

 विक्टिम-सेंट्रिक कानूनों के 3 प्रमुख फीचर्स

1. विक्टिम को अपनी बात रखने का मौका

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2. इन्फॉर्मेशन का अधिकार और

3. नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति का अधिकार

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 जीरो एफआईआर दर्ज करने को किया संस्थागत

 अब एफआईआर कहीं भी दर्ज कर सकते है।

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 विक्टिम को एफआईआर की एक प्रति निःशुल्क प्राप्त करने का अधिकार

 90 दिनों के भीतर जाँच में प्रगति की जाकारी

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राजद्रोह को हटाना और ‘देशद्रोह’ की व्याख्या

 गुलामी की सभी निशानियों को समाप्त करना

 अंग्रेजो का राजद्रोह कानून राज्यों (देश) के लिए नहीं बल्कि शासन के लिए या

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 ‘राजद्रोह’ जड़ से समाप्त

 लेकिन, देश विरोधी हरकतों के लिए कठोर सजा

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 भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ कार्य पर 7 साल तक या आजीवन कारावास

पुलिस की जवाबदेहिता में इजाफा

 सर्च और जब्ती में वीडियोग्राफी अनिवार्य

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 गिरफ्तार व्यक्तियों की सूचना देना अनिवार्य

 3 वर्ष से कम कारावास/60 वर्ष से अधिक उम्र में पुलिस अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य

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 गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटों के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा।

 20 से अधिक ऐसी धाराएँ है जिनसे पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित होगी

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 पहली बार पार्लियामेंट्री इंक्वारी का प्रावधान किया गया।

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