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जालोर

एक बेटा विदेश में, एक व्यवसाई और पुत्रवधु सरपंच, फिर भी शंखवाली के नाथूसिंह खाद्य सुरक्षा के गेहूं खाने को मजबूर, जबकि गांव के कई गरीबों का सूची में नाम तक नहीं

  • खाद्य सुरक्षा योजना सूची में खोट
  • ताक पर पात्रता

दिलीप डूडी, जालोर. शीर्षक पढ़कर आप अचंभित हो सकते है, लेकिन जालोर जिले के आहोर उपखंड के शंखवाली गांव की सत्यता यही है। यहां गांव में आर्थिक रूप से कमजोर कई परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना में गेहूं नहीं मिल रहे है, जबकि यहां कई धनाढय लोग खाद्य सुरक्षा योजना में लाभ ले रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि स्वयं सरपंच के ससुर नाथूसिंह भी इसी योजना के तहत हर महीने गेहूं प्राप्त कर रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि गांव की उचित मूल्य की दुकान का रिकॉर्ड बता रहा है।

खाद्य सुरक्षा योजना सूची में खोट

नाथूसिंह का एक बेटा विशनसिंह विदेश में है, जबकि दूसरा बेटा अन्य राज्य में व्यवसायरत है। वहीं इनकी पुत्रवधु निरमा कंवर स्वयं सरपंच है। नाथूसिंह बुजुर्ग है, उन्हें स्वयं को पता है या भी नहीं, लेकिन इनके नाम से हर महीने राशनकार्ड में शामिल परिवार के 6 सदस्यों लिए खाद्य सुरक्षा योजना के 30 किलो गेहूं वितरित हो रहे है। पारिवारिक व्यवस्थाओं को देखते हुए क्या नाथूसिंह इन गेहूं का उपयोग घरों में करते है, यह कहना तो सम्भव नहीं होगा, लेकिन गांव में नाथूसिंह की तरह कई ऐसे लोग है जो खाद्य सुरक्षा योजना की पात्रता नहीं रखते, वे भी इसका राशन ले रहे है। पीड़ा यह है कि गांव में कई परिवार ऐसे है जिनका जीवनयापन दिहाड़ी पर चलता है, उनका नाम तक खाद्य सुरक्षा योजना में जोड़ा नहीं गया है। इस प्रकार की खामियां खाद्य सुरक्षा योजना को कमजोर कर रही है।

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वंचित बोले हमें कब मिलेगा गेहूं

शंखवाली गांव में खाद्य सुरक्षा योजना की जानकारी लेने पहुंचे तो धरातल पर वास्तविकता कुछ अलग ही नजर आई। नैनसिंह पुत्र छोगसिंह राजपुरोहित ने कहा कि उनका परिवार योजना के लिए पात्र है, लेकिन सूची में नाम नहीं जोड़ा गया है। जिस कारण हमें गेहूं का लाभ नहीं मिल रहा है। इसी प्रकार गजेदास पुत्र सांवलदास संत ने बताया कि उनका परिवार वर्षों से इस गांव में निवासरत है, लेकिन राशनकार्ड बना होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिलता। जबकि योजना की वो पात्रता पूरी करते हैं। इसी प्रकार नारायणलाल पुत्र मोहनलाल मीणा ने बताया कि उन्होंने पंचायत में कई बार आवेदन किए लेकिन उनका नाम नहीं जोड़ा गया। क्या कमी है यह हमें भी पता नहीं है, हम तो कच्चे घरों में निवास करते है। इनके अलावा भी कई दिहाड़ी मजदूरी पर परिवार का जीवनयापन करने वाले लोगों ने बताया कि पंचायत में उन्होंने आवेदन किये, लेकिन उन्हें इसमें जोड़ा नहीं जा रहा है। साथ ही कोई उचित जवाब ही नहीं मिल रहा।

बंगले वाले डकार रहे गरीबों का राशन
बंगले वाले डकार रहे गरीबों का राशन

ऐसा नहीं कि गांव में खाद्य सुरक्षा योजना की सूची छोटी है, बल्कि गांव में उचित मूल्य के दो दुकानदार है। एफपीएस कोड 656 में 312 तथा एफपीएस कोड 657 में 512 परिवारों को शामिल किया हुआ है, जिसमें शामिल परिवार के प्रति सदस्य को हर महीने 5 किलो गेहूं उपलब्ध करवाए जा रहे है। लेकिन इस सूची में शामिल ऐसे कई लोग है जिनके बड़े बड़े बंगले और लग्जरी गाड़ियां है और बड़े बड़े खेत भी है, जो सूची में शामिल होने की पात्रता भी नहीं रखते। इसके बावजूद उनके नाम शामिल है, जबकि जो जरूरतमंद आर्थिक रूप से कमजोर है, उनके नाम तक शामिल नहीं है। वंचित लोगों का कहना है कि उन्हें इस योजना का लाभ दिलाया जाय।

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किनको मिल सकता है खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ

इस योजना में आर्थिक रूप से कमजोर (जिनकी सीमित आय हो), गरीबी रेखा से नीचे, वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं, कच्चा मकान वाले को लाभ मिल सकता है। जिनके घर में टू व्हिलर या फोर व्हिलर नहीं होना चाहिए। दो हेक्टेयर से कम जमीन हो, सरकारी या अर्ध सरकारी कर्मचारी या किसी प्राइवेट कंपनी में कर्मचारी होने पर लाभ नहीं दिया जा सकता।

इनका कहना है…

गांव में काफी संख्या में लोगों को खाद्द सुरक्षा योजना के तहत जोड़ा हुआ है। कोई वंचित है और वो योजना में पात्र है तो आवेदन मंगवाकर उन्हें जोड़ दिया जाएगा। जो अपात्र है, रिव्यू कर हटवा देंगे।

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– निरमाकंवर, सरपंच, शंखवाली

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