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ओड़वाड़ा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, हालात जानने पहुँचे सरकार के दो मंत्री, कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने अनु को कन्यादान में एक लाख रुपए की घोषणा की

  • हाइकोर्ट के आदेश पर हटाया था अतिक्रमण
  • शुक्रवार को हाइकोर्ट ने मामले में दिया स्टे

जालोर. जिले के ओड़वाड़ा गाँव में गुरुवार को उच्च न्यायालय जोधपुर की ओर से जारी आदेश के बाद प्रशासन की ओर से चिन्हित किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही हुई। इस दरम्यान पहले दिन चिन्हित 70 अतिक्रमण हटाए गए, जिसमे चारदीवारी तोड़ी गई, लेकिन किसी रहवासी मकान को नहीं तोड़ा गया था। इधर शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने ओड़वाड़ा मामले में स्थगन आदेश जारी किया और दस्तावेज जांच के आदेश दिए। जिसके बाद दूसरे दिन लोगो को राहत मिली। इधर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के बाद मामला गरमा गया और सरकार भी हलचल में आ गई, आहोर विधायक छगनसिंह राजपुरोहित गुरुवार को ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मिलने पहुँचे और मामले में अवगत कराया।

ओड़वाड़ा मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने ट्वीट कर राज्य सरकार को घेरा तो शुक्रवार को केबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, विधायक छगनसिंह, संगठन मंत्री भाजपा सांवलाराम देवासी ओड़वाड़ा गांव पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। साथ ही लोगों की हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं गुरुवार को कार्यवाही के दौरान काटे गए बिजली कनेक्शन को भी शुक्रवार को जोड़ा गया। इधर इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर ने भी प्रेस वार्ता कर कहा कि किसी का मकान नहीं तोड़ा गया है, प्रशासन सर्वे करवाकर पता लगाने का प्रयास करेगा कि कोई परिवार बेघर नहीं हो।

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कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल पहुँचा ओड़वाड़ा

ओड़वाड़ा में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के बाद शुक्रवार को कांग्रेस की ओर से एक कमेटी का गठन किया, जो ओड़वाड़ा गांव में जाकर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के बाद लोगों से मिलने उनके हालात जानने के लिए पहुँचे, जिसमें पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई, जालोर से कांग्रेस के प्रत्याशी वैभव गहलोत, कांग्रेस महासचिव मोहन डागर, हरीश चौधरी, ललित बोरीवाल शामिल थे। इस दौरान उन्होंने ओड़वाड़ा में लोगों से मिलकर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान उनके साथ हुए व्यवहार की शिकायतें सुनी और नुकसान का जायजा लेकर हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

इस दौरान उन्होंने पीड़ितों को आस्वस्त किया कि उनकी लड़ाई वे लड़ेंगे। उन्होंने सीता देवी पत्नी छोटूलाल श्रीमाली को बेटी अनु की शादी के लिए एक लाख रुपए चेक द्वारा मदद के रूप में देने की बात कही।

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पूर्व सरपंच बोली मैंने गलत किया है तो पहले मुझे सजा दो

शुक्रवार को पूर्व सरपंच प्रमिला पुरोहित गांव में पहुँची। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मैं 1994 में ओड़वाड़ा की सरपंच रह चुकी हूं मैने भी 12 पट्टे जारी किए, लेकिन मुझे यह भूमि ओरण की है इसकी जानकारी नहीं थी कि यह जमीन ओरण की है। उन्होंने कहा कि मैंने गलत किया है तो तत्कालीन तहसीलदार और पटवारी भी दोषी है तो वो भी कथित रूप से दोषी है।

लोग कह रहे अब हो स्थाई समाधान

ओड़वाड़ा के पीड़ितों का कहना है कि हम इस जमीन पर पिछले करीब 50 वर्षों से रह रहे हैं, कई लोग कह रहे हैं कि हमारे पास ग्राम पंचायत के पट्टे भी है, इसके बावजूद कार्यवाही हुई है, लेकिन अब हम चाहते हैं कि सरकार इसका कोई समाधान करें ताकि भविष्य में कोई परेशानी नहीं हो।

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हाईकोर्ट ने कहा वेरिफिकेशन करें प्रशासन

राजस्थान हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जालोर के ओडवाड़ा गांव में अतिक्रमण हटाने पर रोक लगा दी है. जस्टिस विनीत माथुर ने आदेश जारी करते हुए प्रशासन को सबसे पहले दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करने के लिए कहा है. कोर्ट ने साफ किया है कि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं हटाया जाएगा. इस संबंध में अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने बाबू सिंह व अन्य की ओर से हाई कोर्ट में पक्ष रखा गया था, जिसमें कहा गया था कि जिला प्रशासन ने बिना विधिक प्रक्रिया के बुलडोजर चलाया है. इस केस की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर अस्थाई रोक लगा दी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने पैरवी करते हुए कहा कि हमारे पास 1930 से यहां रहने का प्रमाण है. इसके अलावा हमारे को पट्टे दे रखे हैं. सनद दे रखी है. लेकिन जिला प्रशासन ने केवल पीएलपीसी के ऑर्डर के चलते एक तरफा कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. जबकि हमारे दस्तावेजों का वेरिफिकेशन नहीं किया गया. तीन दशक से हम यहां रह रहे हैं, जिसके लिए हमें यहां जिला प्रशासन द्वारा ही पट्टे जारी किए गए थे. केवल 91 का नोटिस जारी करते हुए यह पूरी कार्यवाही की गई, जो उचित नहीं थी.

प्रशासन ने गिराई थी दीवारें

दरअसल, ओडवाड़ा गांव पिछले 24 घंटे से सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड कर रहा है. गुरुवार सुबह 7 बजे इस गांव में तहसीलदार 250 पुलिसकर्मी और 5 जेसीबी को लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंच गए थे. इस दौरान ग्रामीणों के भारी विरोध के बावजूद उन्होंने साढ़े 6 घंटे में 70 मकानों की दीवारें व गेर रहवासी ध्वस्त कर दिए. वहीं कई घरों के बिजली कनेक्शन काट दिए. इसके बाद जिला प्रशासन की टीम घरों से समान निकालने के लिए ग्रामीणों को 24 घंटों की मोहलत देकर वापस लौट गई. आज फिर एक्शन होने वाला था. लेकिन इससे पहले ही हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर अस्थाई रोक लगा दी.

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