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जालोर

गर्मियों में जल संकट से निपटने के लिए अग्रेसिव मोड में आया जालोर का जलदाय विभाग, जानिए, कैसी है पेयजल व्यवस्था

  • दोनों बड़े शहरों को 72 घण्टे के अंतराल से मिल रहा है पानी
  • जालोर जिले में 59 नए ट्यूबवेल्स की मिल चुकी है स्वीकृति

दिलीप डूडी, जालोर. गर्मियों के मौसम में अक्सर आमजन को सबसे बड़ी दिक्कत पानी को लेकर रहती है। खासकर पेयजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से हाहाकार की स्थिति पैदा हो जाती है। जालोर जिला भी इससे अछूता नहीं है। ऐसी समस्या से अक्सर जालोर जिला जूझता रहा है। यहां नर्मदा प्रोजेक्ट के तहत काफी कार्य हो भी चुका है, लेकिन अभी तक पर्याप्त मात्रा में पानी की उपलब्धता नहीं हो पा रही है।

इसी स्थिति को देखते हुए जालोर के जलदाय विभाग ने भी कमर कस ली है। सांचौर जिला नवगठित होने के कारण अब जालोर जलदाय वृत में जालोर और भीनमाल दो खण्ड ही शामिल है। यहां जलदाय विभाग ने जलसंकट की आशंका को देखते हुए पूर्व तैयारियां की है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। ताकि किसी को पेयजल किल्लत की समस्या नहीं झेलनी पड़े।

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जानिए कैसी है जालोर जिले की पेयजल व्यवस्था…

जालोर अधीक्षण अभियंता वृत क्षेत्र जालोर व भीनमाल दो जलदाय खण्ड है। साथ ही दो बड़े शहर भी जालोर व भीनमाल है। वर्तमान में जालोर से ज्यादा भीनमाल में पानी की समस्या बताई जा रही है। जालोर में नर्मदा का पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन भीनमाल में इसकी पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। जिस कारण जलदाय विभाग ने भी अपनी तैयारियां की है। ताकि गर्मी के सीजन में दिक्कतें नहीं हो।

जालोर शहर की यह है स्थिति

जालोर शहर में वर्तमान में 69 हजार 224 जनसंख्या के हिसाब से पानी सप्लाई किया जा रहा है। जालोर शहर में नर्मदा नहर का पानी व 27 ट्यूबवेल्स के पानी की मिलाकर सप्लाई किया जा रहा है। कुआंबेर के 10 ट्यूबवेल, रणछोडनगर के 12, खानपुर के 2, सोनपुरा स्थित 3 नलकूपों से पानी सप्लाई किया जा रहा है। जालोर शहर के लिए करीब 8 हजार 500 किलोलीटर औसत दैनिक उत्पादन है। वर्तमान में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 122 लीटर पानी की उपलब्धता करवाई जा रही है। जालोर शहर में 48 से 72 घण्टे के बीच पानी सप्लाई किया जा रहा है।

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भीनमाल शहर के ऐसे है हाल

भीनमाल शहर की वर्तमान की 61 हजार 353 जनसंख्या मानते हुए जलापूर्ति की जा रही है। भीनमाल शहर में नर्मदा का पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिस कारण 18 नलकूपों से पानी लिया जा रहा है। धनवाड़ा के 8 तथा राजपुरा के 10 नलकूपों से पानी सप्लाई किया जा रहा है। भीनमाल शहर के लिए 5 हजार 500 किलो लीटर वर्तमान में औसत दैनिक उत्पादन हो रहा है। उपलब्धता कम होने के कारण प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 90 लीटर के हिसाब से जलापूर्ति की जा रही है। भीनमाल शहर को 72 से 96 घण्टे के बीच सप्लाई मिल रही है।

जालोर जिले के गांवों में हालात

जालोर जिले के 374 गांवों में अलग अलग योजनाओं के तहत जल सप्लाई किया जा रहा है। नर्मदा का मीठा पानी कई गांवों को मिलना शुरू हो चुका है तो कहीं पानी अभी तक पहुंचा नहीं है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक क्षेत्रीय योजना के तहत 39 योजनाओं के अंतर्गत 101 गांवों को तथा पाइप्ड योजना के तहत 116 गांवों में 48 घण्टे से लेकर 96 घण्टे के अंतराल में जलापूर्ति की जा रही है। वहीं पीएंडटी योजना के तहत 153 गांवों को 24 घण्टे सप्लाई मिल रही है। साथ ही 4 गांवों में स्वजलधारा के तहत दो दिनों के अंतराल में पानी मिल रहा है।

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जलदाय विभाग ने की है कुछ तैयारियां

जल संकट से निपटने के लिए खराब हुई मोटरों को बदलने समेत आदि कार्यों के लिए सरकार ने हर जिले को 50 लाख रुपए स्वीकृत किये हैं। इसके तहत विभाग ने पम्प बदलने व मोनो ब्लॉक सेट के लिए भीनमाल में 25 लाख का कार्य पूरा कर दिया है और जालोर खण्ड में 15 मई तक पूरा कर दिया जाएगा। टैंकरों की जरूरत होने पर जालोर शहर के लिए 2 लाख 1 हजार व भीनमाल शहर के लिए 3 लाख 66 हजार रुपए की स्वीकृति ली जा चुकी है। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से भी व्यवस्था की जाएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1 करोड़ 52 लाख 62 हजार रुपये स्वीकृत किये जा चुके हैं, जहां जलसंकट के समय गांवों में टैंकरों से पानी उपलब्ध करवाया जा सकेगा। इसमें जालोर के 14 मुख्य गांव व 24 ढाणी के लिए 63.68 लाख रुपये तथा भीनमाल के 27 गांवों व 99 ढाणियों के लिए 88.94 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। वर्तमान में टैंकरों से सप्लाई नहीं की जा रही है, जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग लिया जा सकेगा। इसी प्रकार जालोर जिले में 59 नए ट्यूबवेल के लिए भी स्वीकृति मिल चुकी है, जिसमें जालोर में 46 व भीनमाल खण्ड क्षेत्र में 13 नए ट्यूबवेल खोदे जाने है। आदर्श आचार संहिता के कारण कार्य नहीं हो सका, जिस कारण जून महीने में यह कार्य किया जा सकेगा। इसी प्रकार जिले में हैण्डपम्पों की मरम्मत का कार्य भी अभियान चलाकर किया जा रहा है।

हम अग्रेसिव मोड में है न कि डिफेंसिव

गर्मियों के मौसम पानी की जरूरत बढ़ जाती है। जालोर जिले में इस बार जल संकट से नहीं जूझना पड़े, इसके लिए हमने प्लान बना लिए हैं। हम टीमवर्क के साथ अग्रेसिव मोड में है न कि डिफेंसिव। हर दिन मॉनिटरिंग होती है और प्रतिदिन एक घण्टा जनसुनवाई भी की जा रही है, ताकि लोगों को पानी को लेकर समस्या न हो।

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– रमेशचन्द्र मीणा, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग जालोर वृत्त

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