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पीसीसी सदस्य सोमाभाई सरगरा ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा

  • पार्टी में बार बार अनदेखी से आहत हुए सोमाभाई सरगरा

जालोर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के चुनाव मैदान में होते हुए भी जालोर कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है।

भाद्राजून ब्लॉक से पीसीसी सदस्य व वरिष्ठ नेता सोमाभाई सरगरा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। शनिवार को जयपुर में सोमाभाई ने भाजपा ज्वाइन की है। जानकारी में सामने आया है कि सोमाभाई ने कांग्रेस पार्टी में बार बार अनदेखी करने से आहत होकर पार्टी छोड़ी है।

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जिला कांग्रेस के टॉप दस नेताओं में शामिल थे सोमाभाई

सोमाभाई सरगरा अनुसूचित जाति वर्ग से है, जिनका मूल वोटबैंक कांग्रेस समर्थित रहा है। इसे देखते हुए कांग्रेस में सोमाभाई का भी कद बढ़ाया था। जालोर जिला कांग्रेस में टॉप दस नेताओं में सोमाभाई भी शामिल थे। जिले में पांच विधानसभा सीटों में से हर ब्लॉक से कांग्रेस एक को प्रदेश कांग्रेस कमेटी में शामिल करती है। डेढ़ वर्ष पहले हर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी(विधायक) के साथ एक अन्य को भी पीसीसी सदस्य बनाया गया था। जिसमें सोमाभाई सरगरा को आहोर विधानसभा सीट से भाद्राजून ब्लॉक से पीसीसी सदस्य बनाकर उनका कद बढ़ाया था। अब सोमाभाई के भाजपा में जाने से कांग्रेस को इस वर्ग से नुकसान होने की आशंका रहेगी।

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जहां काँग्रेस हारी, वहां स्थिति संकट में

जालोर-सांचौर जिले की पांच सीटों में से 2023 के चुनाव में रानीवाड़ा व भीनमाल को छोड़कर शेष तीनों सीट कांग्रेस हार गई। इन तीनों सीटों पर आज कांग्रेस मुश्किल में है। तीनों सीटों में एक एक पीसीसी सदस्य ही रह है। सांचौर सीट से डॉ शमशेर अली के निर्दलीय चुनाव लड़ने से एक पीसीसी सदस्य तब बाहर हो गया था। वहीं जालोर सीट के सायला ब्लॉक से पीसीसी सदस्य बनी पूर्व प्रत्याशी मंजू मेघवाल ने निर्दलीय का सहयोग किया, जिस कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया। अब आहोर सीट के भाद्राजून ब्लॉक से सोमाभाई के पार्टी छोड़कर जाने से कांग्रेस के लिए संकट बढ़ गया है। वहीं जहां कांग्रेस जीती, वहां अभी स्थिति ठीक है। भीनमाल सीट के भीनमाल से डॉ समरजीतसिंह व बागोड़ा से उमसिंह चांदराई पीसीसी सदस्य है। इसी प्रकार रानीवाड़ा से रतन देवासी व जसवंतपुरा ब्लॉक से मोडाराम भील पीसीसी सदस्य है।

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सोमाभाई ने सम्मेलन कर दिखाई थी ताकत

विधानसभा चुनाव से पहले सोमाभाई सरगरा ने भी बागरा में सम्मेलन आयोजित कर सरगरा समाज को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की थी। उनका कहना था कि प्रदेश में अनुसूचित जाति की रिजर्व सीटों में से केवल एक सीट पर ही समाज के प्रतिनिधि को मौका देना चाहिए। हालांकि वे स्वयं जालोर सीट से भी दावेदारी जता रहे थे, लेकिन पार्टी ने उनको चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया। इस कारण अब लोकसभा चुनाव में मौका देख भाजपा ज्वाइन की है।

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