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जालोरराजनीति

बेटे को सांसद बनाने के प्रयास में जुटे गहलोत को बड़ा झटका, जालोर में बाहरी का विरोध करने वाले लालसिंह बने बसपा के उम्मीदवार

दिलीप डूडी, जालोर. बेटे को सांसद बनाने की कोशिशों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। जालोर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष लालसिंह राठौड़ ने कांग्रेस छोड़ दी है, उन्हें बसपा से उम्मीदवार बनाया गया है। लालसिंह राठौड़ ने कांग्रेस की टिकट घोषणा से पहले वराडा में एक आयोजन कर स्पष्ट रूप से चेतावनी दे दी थी कि अगर किसी बाहरी को टिकट दे दिया तो वे निर्दलीय लड़ेंगे। अब लालसिंह बसपा से मैदान में उतरे है। इससे कांग्रेस के लिए मुश्किलें हो सकती है।

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पायलट हाथों ज्वॉइन की थी कांग्रेस

लालसिंह राठौड़ ने 2017 में तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस ज्वाइन की थी। उसके बाद पार्टी ने कांग्रेस कमेटी खनन एवम उत्थान प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव बनाया। सन 2023 में कांग्रेस ने जिला उपाध्यक्ष बनाया।इस अवधि में लालसिंह राठौड़ ने आहोर विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी की थी, लेकिन टिकट नहीं मिला। इस कारण इन्होंने लोकसभा के लिए दावेदारी की। साथ ही आयोजन कर बाहरी व्यक्ति का विरोध किया था, लेकिन यहां काँग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इससे लालसिंह नाराज हो गए, उन्होंने समाजबंधुओं व कार्यकर्ताओं से सलाह मशविरा करने के बाद काँग्रेस छोड़कर बसपा ज्वाइन की और पार्टी ने उन्हें अब जालोर संसदीय सीट पर उम्मीदवार घोषित किया है।

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ग्रेनाइट अध्यक्ष बनकर चर्चा में आए

लालसिंह राठौड़ जालोर ग्रेनाइट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे है। केंद्र सरकार की ओर जीएसटी लागू करने के दौरान ग्रेनाइट पत्थर पर 28 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में रखा था, जिसका लालसिंह के नेतृत्व में उद्यमियों ने विरोध किया। जिस पर सरकार ने 18 प्रतिशत के स्लैब में ग्रेनाइट को शामिल किया।

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कांग्रेस के वोटर्स में बसपा की सेंधमारी

जालोर संसदीय सीट पर कांग्रेस ने इस बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को प्रत्याशी बनाया है। वहीं भाजपा ने लुम्बाराम चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। अब कांग्रेस छोड़कर बसपा से लालसिंह के उम्मीदवार बनने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। क्योंकि कांग्रेस के वोटबैंक में बसपा की सेंधमारी है। यह पिछले विधानसभा चुनावों में बसपा जाहिर करवा चुकी है। बसपा ने सांचौर विधानसभा सीट व 2018 में आहोर सीट पर इस प्रकार के समीकरण बनाकर कांग्रेस को झटका दे चुकी है।

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