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जातीय समीकरणों में उलझी भाजपा भीनमाल में डॉ भूपेंद्र चौधरी पर भी कर रही है विचार

  • लगातार जीत रहे पूराराम चौधरी की टिकट पर मंडरा रहा है खतरा

दिलीप डूडी, जालोर. उच्च सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त हो या फिर किसी विशेष प्रोफेशनल कार्य से जुड़े व्यक्ति, अगर जनता में उसकी अच्छी पकड़ है तो उसे अक्सर राजनीति में दल खींचकर ले जाते है, खासकर भाजपा में तो यह परिपाटी देखने को मिल जाती है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में कई चेहरे ऐसे भी है जो प्रोफेशन की विशेषज्ञता के कारण आज मंत्री पद पाए हुए हैं। अगर इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस बार डॉ भूपेंद्र चौधरी पर दांव लगा दे तो अतिशयोक्ति वाली बात नहीं होगी। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस पहलू पर विचार भी कर रही है, हालांकि अभी किसी प्रकार का निर्णय नहीं हुआ है।

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भाजपा के लिए इसलिए बदलाव जरूरी

दरअसल, भाजपा 1993 से लगातार भीनमाल में पूराराम चौधरी को टिकट दे रही है। शुरुआत में पूराराम के एक बार जीतने के बाद चौधरी लगातार दो बार हार गए। उसके बाद जब परिसीमन हुआ तो भाजपा को फायदा हुआ और पूराराम चौधरी लगातार तीन बार जीतने में कामयाब हो गए। इस कारण एन्टीइनकम्बेंसी भी बन चुकी है। पार्टी अब नए चेहरे को मौका भी देना चाहती है, लेकिन पूराराम चौधरी ने जिस प्रकार से क्षेत्र में जड़ें जमा रखी है उसके लिहाज से पार्टी को डर लगता है कि पूराराम चौधरी की टिकट कटने पर जीतना तब तक मुश्किल है, जब तक की पूराराम के अलावा पूराराम के किसी समर्थक या ऐसे मजबूत आदमी को टिकट न मिले। यहां भीनमाल में यूं तो दावेदार खूब है कि पार्टी के लिए मजबूत निर्णय करना मुश्किल हो रहा है। यहां टीकमसिंह राणावत, सांवलाराम देवासी और रमेश पुरोहित अन्य समाज के मजबूत दावेदार भी है, लेकिन ये भी जातीय समीकरण में उलझे हुए है। इन जातियों का प्रतिनिधत्व संसदीय क्षेत्र की अन्य सीटों पर हो रहा है, जहां फिलहाल पार्टी छेड़छाड़ करने के मूड में नहीं दिख रही है।

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ऐसे में पार्टी की मंशा और सर्वे के मुताबिक भीनमाल में उम्मीदवार परिवर्तन तो करना चाह रही है, लेकिन जातीय परिवर्तन की रिस्क नहीं लेना चाह रही है। ऐसी स्थिति में यहां पुखराज बगोटी, नरिंगाराम चौधरी, नरसीराम चौधरी व जामताराम चौधरी जैसे नेता दावेदारी तो कर रहे है, लेकिन फिलहाल ये दावेदार पूराराम चौधरी का मजबूत विकल्प नहीं बन पा रहे है। इस कारण पूराराम की टिकट काटकर इन दावेदारों पर पार्टी रिस्क नहीं लेना चाह रही है। लिहाजा अब फिर से डॉ भूपेंद्र चौधरी का नाम चर्चा में आया है। पार्टी के उच्च स्तर पर भी इस पर विचार और मंथन शुरू हुआ है।

इसलिए डॉ भूपेंद्र चौधरी पर होने लगा विचार

डॉ भूपेन्द्र चौधरी भीनमाल क्षेत्र के रहने वाले है और भीनमाल मुख्यालय पर स्वयं का अस्पताल संचालित करते है। जालोर और सांचौर दोनों जिलों में निजी अस्पतालों की सूची में डॉ भूपेंद्र चौधरी अस्पताल प्रथम नम्बर पर है। इसका मुख्य कारण यह है कि खुद भूपेंद्र चौधरी मरीजों का इलाज करते है और रोग विशेषग्य भी है। इनका जनता के साथ बेहद संजीदा जुड़ाव है। इनकी सेवा के कारण ही हर समाज में इनकी बेहद मजबूत पकड़ है। सबसे बड़ी बात है कि इनमें राजनीतिक लालसा नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी इन पर विचार किया था लेकिन इन्होंने मना कर दिया था। अब फिर से डॉ भूपेंद्र चौधरी का नाम भाजपा के दफ्तरों में चर्चा में है। देखना यह है कि पार्टी क्या निर्णय लेती है।

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डॉ चौधरी के नाम पर बन सकती है एक राय

हालांकि डॉ भूपेंद्र चौधरी ने तो अभी फिलहाल कहीं कोई अपने प्रयास या आवेदन तो नहीं किये, लेकिन सूत्रों के मुताबिक डॉ चौधरी के नाम पर पार्टी विचार करती है तो न केवल जातीय उलझन भी सुलझेगी बल्कि अन्य दावेदार भी सहमत हो सकते है।

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