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पूर्व आईएएस के साथ एनिडेस्क से 6 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी, पुलिस ने गहन जांच कर राशि करवाई रिफंड

  • आरोपियों की तलाश जारी

जालोर. सेवानिवृत आईएएस से 6 लाख रुपए ऑनलाइन ठगी करने के मामले में जालोर साइबर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। साइबर पुलिस ने गहनता से जांच कर राशि रिफंड करवाई है। जबकि आरोपी का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।

साइबर थाना के डीएसपी देरावरसिंह ने बताया कि 7 जुलाई रामसीन निवासी गंगासिंह परमार ने रिपोर्ट पेशकर बताया कि 05 जुलाई 2023 को स्नैपडिल के कस्टमर केयर के नम्बर उन्होंने गूगल पर सर्च किये, तब एक नम्बर 6289251460 आया। इस नम्बर पर उन्होंने सम्पर्क किया और स्नैपडिल सम्बन्धी रिफंड की समस्या उनको बताई तो उन्होंने कहा कि वे पैसा रिफंड करवा देंगे, इसके लिए उन्होंने एनिडेस्क नाम का ऐप डाउनलोड करने को कहा और कुछ जानकारी साझा करने का बोला। जिस पर उन्होंने ऐप डाउनलोड किया तो बैंक खाते से 5 लाख 89 हजार 990 रुपए हड़प लिये है, जिस पर उन्होंने साइबर थाना जालोर में मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया।

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एसपी ने दिखाई गम्भीरता

मामले को लेकर एसपी मोनिका सैन ने गम्भीरता दिखाई। उन्होंने साइबर सेल प्रभारी डीएसपी देरावरसिंह के नेतृत्व में साइबर विशेषज्ञ टीम हेड कांस्टेबल दीपसिंह मय जाब्ता का गठन किया। पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए बैंक खातों से जिन खातों में राशि ट्रान्सफर हुई उन खातों का पता लगाया, उसके बाद तकनीकी पहलुओं पर विश्लेषण कर व नवीनतम तकनीकी संसाधन का प्रयोग कर कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए आरोपियों के बैंक खातों में हुए ट्रान्जेक्शनों को बैंकों के नोडल अधिकारियों से तुरन्त समन्वय स्थापित कर पीड़ित के खाते से हुये अनाधिकृत ट्रान्जेक्शनों को निरस्त करवाया तथा आरोपी के खातों को फ्रीज करवाया और ट्रान्जेक्शन हुई सम्पूर्ण रकम को पुन: पीड़ित के बैंक खाते में रिफण्ड करवाया। मामले में आरोपियों का पता लगाया जा रहा है।

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ठग यूं करते है वारदात

साइबर ठगों द्वारा अपने मोबाइल नम्बर गूगल पर हेल्पलाइन नाम से अपलोड कर दिये जाते है। पीड़ित द्वारा गूगल पर हेल्पलाइन नम्बर सर्च सहायता हेतु सम्पर्क किया तो आरोपी ने पीडित को समस्या का निस्तारण करने का आश्वासन देकर पीड़ित से अपने फोन में ऐनीडेस्क नाम का कन्ट्रोल एनिडेस्क एप्प डाउनलोड करवा दिया। पीडित के मोबाईल का सम्पूर्ण कन्ट्रोल आरोपी ने अपने पास लेकर ऑनलाईन बैंकिग के माध्यम से पीड़ित के खाते से अपने खातों में रुपयों का ट्रान्जेक्शन कर दिया।

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पुलिस का आमजन को सुझाव

साइबर क्राइम या फ़्रॉड की घटना की तुरन्त शिकायत ऑनलाइन दर्ज करावें या फिर 1930 पर कॉल करके दर्ज कराना चाहिए।गूगल आदि सर्च इंजन पर किसी भी कस्टमर केयर का नम्बर खोजते समय आधिकारिक वेबसाईट का ही उपयोग करें। किसी भी एप्प को अपनी डिवाईस में स्टॉल करने से पूर्व उसके बारें में जानकारी प्राप्त कर ले। अनजान कॉल/मैसेज / लिंक को नजरअन्दाज करें। पिन / ओटीपी / सीवीवी नम्बर किसी भी व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करें। धनराशि प्राप्त करने के लिए पिन / ओटीपी / सीवीवी नम्बर की आवश्यकता नहीं रहती है। गलत या धोखे से गलत व्यक्ति के खाते में यूपीआई से धनराशि ट्रान्सफर होने पर www.npci.org.in पर ऑनलाईन शिकायत दर्ज करें।

इस टीम ने की कार्रवाई

प्रभारी देरावरसिंह के साथ दीपसिंह, चम्पालाल, विरेन्द्र प्रतापसिंह, भैराराम, ललित चौधरी, अशोक कुमार, शैतान मीणा टीम में शामिल रहे। प्रभारी ने बताया कि ठगी की राशि को आरोपियों द्वारा बैंक खातों से विड्रॉल करने से पूर्व सम्बधित बैंकों से त्वरित समन्वय स्थापित कर ठगी की सम्पूर्ण राशि पीड़ित के बैंक खाते में रिफंड करवाने की कार्यवाही में कांस्टेबल चम्पालाल का विशेष योगदान रहा है।

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