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स्कूली बेटियों को हो रही परेशानी, भूतवास-झाक रपट निर्माण की ऊँचाई बढ़ाने व जांच करने की मांग

जालोर. भूतवास-झाक मार्ग स्थित नदी पर बने रपट निर्माण की ऊँचाई बढ़ाने व रपट निर्माण की निष्पक्ष जाँच करवाने की मांग ज्ञापन देकर जालोर जिला कलक्टर से की गई। ग्राम झाक भौतिक रूप से एक टापूनुमा गाँव है, जो चारों तरफ़ से नदी नालों से घिरा हुआ गाव हैं, जिसके कारण बारिश के मौसम में से गाँव का संपर्क अन्य गाँव से कट जाता है।

बच्चों को घुटनों से ऊपर पानी से होकर भीगते हुए पैदल ही विद्यालय जाना पड़ता है

गाँव को अन्य गांव से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत झाँक से मांडोली तक सड़क बनी हुई थी परंतु बीच में आने वाली नदी पर रपट या पुलिया बना हुआ नहीं होने से बारिश के मौसम में यहाँ पर कई दिनों तक आवागमन बाधित रहता था, अतः ग्रामीणों ने रपट या पुलिया निर्माण हेतु कई बार धरना प्रदर्शन किया। अतः वर्ष 2022 में जिला कलेक्टर द्वारा झाँक भूतवास मार्ग पर रपट निर्माण हेतु 50 लाख की राशि स्वीकृत की ताकि बारिश के समय में दोनों गाँव के बीच संपर्क न कटे ग्राम पंचायत मांडोली द्वारा जनवरी 2023 में मनरेगा कार्य के तहत 50 लाख की राशि खर्च कार 400 फिट लंबी रपट बनाई परंतु ग्राम पंचायत मांडोली द्वार रपट नदी के तल से लगभग 3 फिट नीचे बनाया गया हैं और इस और न तो ग्राम पंचायत मांडोली और न ही किसी अधिकारी ने ध्यान दिया। जबकि रपट का कार्य कई स्तर की जाँच के बाद पूर्ण होता है परंतु रपट नदी तल से लगभग 3 फिट नीचे कैसे बन गया उस पर किसी अधिकारी की नजर नहीं गई नतीजा यह हुआ कि अब चाहे नदी चल रही हो या बंद हो जब तक इस रपट से पानी के साथ आई बजरी नही हटाई जाती वाहन निकालना असंभव है और बजरी हटा भी दे तो रपट इतना नीचे है कि उसमे दो से तीन फिट तक पानी भर जाता है और रपट स्विमिंग पुल बन जाता है ग्रामीणों द्वारा 20 जुलाई को रपट पर इकट्ठे होकर विरोध प्रदर्शन किया था।

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जिस पर जसवंतपुरा विकास अधिकारी ने रपट पर ग्रामीणों की बात सुनी परंतु रपट की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया और केवल जेसीबी चलवाकर रपट पर मौजूद 3 फिट बजरी को हटवा कर इतिश्री कर दी। परंतु बजरी हटाने के बाद भी ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ और रपट इतना नीचे है कि कल परसों हुई बारिश के बाद नदी आने से उस रपट में पुनः पानी व बजरी भर गई और अब रपट पर इतना पानी जमा हो गया है कि अब रपट रपट नही स्विमिंग पूल की तरह दिखाई देता है ओर उसमे से वाहन निकालना नामुमकिन है अतः लोगों की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है और इसका खामियाजा अगर कोई सबसे ज्यादा भुगत रहा है तो झाँक गाव से उच्च अध्ययन के लिए जाने वाले छात्र व छात्राएं है जो रपट पर बजरी व पानी जमा होने के कारण प्रतिदिन 10 किलोमीटर पैदल चल कर विद्यालय जाते है क्योंकि रपट पर इतनी मात्रा में बजरी इकठ्ठी हो जाती है कि न तो यहां कोई वाहन चलते है और न ही अभिभावक अपने बच्चों को अपने निजी वाहन से विद्यालय छोड़ सकते है क्योंकि उसमे उनके वाहन धँस जाते है और बच्चों को घुटनों से ऊपर पानी से होकर भीगते हुए पैदल ही विद्यालय जाना पड़ता है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई में बाधा पड़ती है बल्कि बार बार नदी पार कर जाने से अभिभावक भी चिंतित रहते हैं और बच्चियों को विद्यालय छुड़वाने को मजबूर होते है।

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