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सांचौर के पूर्व डीएसपी इंदा पर निर्दोष को फसाने का आरोप, न्यायालय ने गृह विभाग के मुख्य सचिव व डीजी को दिये कार्रवाई के निर्देश

जालोर. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति मामलात न्यायालय के विशिष्ठ न्यायाधीश पीयुष चौधरी ने निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करने पर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वास्तविकता का पता लगाकर निर्दोष व्यक्ति को आरोप सांराश में ही दोष मुक्ति करते हुए गलत अनुसंधान करने पर सांचौर के तत्कालीन वृत्ताधिकारी रूपसिंह इंदा के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए मुख्य सचिव गृह विभाग जयपुर को आदेश की प्रति भेजकर कार्यवाही से 6 सितम्बर तक न्यायालय को अवगत करने के आदेश दिये गये।

प्रकरण के अनुसार जीवाराम पुत्र टाबाराम मेघवाल निवासी लाछडी ने पुलिस थाना सांचोर में रिपोर्ट पेश कर बताया कि उसके पुत्र दिलीप कुमार के साथ हरिश उर्फ हरिश कुमार पुत्र बाबूलाल निवासी हेमागुडा तहसील चितलवाना जिला जालोर व दो तीन अन्य व्यक्तियों ने 14 नवम्बर 2022 को शाम 4.20 बजे रोडवेज बस स्टेण्ड सांचोर पर मारपीट की। तब उसका पुत्र दिलीप कुमार आरोपियों के चुंगल से छूटकर अपनी जान बचाने के लिए भागा तो आरोपी लाठी लेकर उसके पुत्र के पीछे उसे जान से खत्म करने के लिए भागे। उसका पुत्र दिलीप के नेशनल हाईव नम्बर 68 पर ट्रक के टकराने से उसके शरीर पर ट्रक चढ जाने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे सांचोर के निजी हाॅस्पीटल में भर्ती करवाने के बाद गुजरात हाॅस्पीटल भर्ती करवाया गया। जीवाराम ने उसके पुत्र के साथ घटना घटित होने का सीसीटीवी फुटेज व वीडियो भी पेश किया। वहीं दिलीप कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई। उक्त घटना का अनुसंधान सांचोर के तत्कालीन डिप्टी रूपसिंह इंदा ने शुरू किया। अनुसंधान अधिकारी डिप्टी इंदा ने उक्त प्रकरण में ट्रक ड्राइवर बिटूसिंह पुत्र गुरमेलसिंह निवासी लागियाना पुलिस थाना बाघापुराना जिला मोगा पंजाब को दिलीप कुमार के साथ दुर्घटना करने का आरोपी बनाया गया। घटना के करीब तीन माह बाद 3 मार्च 2023 को मुख्य आरोपी हरिश कुमार को गिरफ्तार किया गया। उस दौरान न्यायाधीश चौधरी ने अनुसंधान अधिकारी से वास्तविक उक्त प्रकरण की सीसीटीवी फुटेज व विडियो देखे। जिसमें दिलीप कुमार ट्रक के नीचे आने से पहले तेजगति से आ रही कार से टकराता नजर आ रहा है।

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पुलिस ने बिटूसिंह के विरुद्ध दुर्घटना कारित करने का तथा हरिश के विरुद्ध आपराधिक मानववध तथा एससी – एसटी एक्ट की धारा में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। तथा कार चालक के विरुद्ध अनुसंधान पेडिंग रखा। आरोप सांराश के दौरान विशिष्ठ न्यायाधीश चौधरी ने पुलिस पत्रावली देखने एवं सीसीटीवी फुटेज व विडियो देखने के बाद ज्ञात हुआ कि ट्रक चालक बिटूसिंह को पुलिस द्वारा गलत तरीके से आरोपी बनाया गया है। जिस कार के चालक की लापरवाही से दुर्घटना हुई उसे अनुसंधान अधिकारी ने छोड़ दिया। उसे इस मामले से निकाल दिया। सीसीटीवी फुटेज को देखने के बाद स्पष्ट नजर आ रहा है कि मृतक दौड़ता नजर आ रहा है तथा उसके पीछे एक व्यक्ति भाग रहा है। मृतक भागते हुए सड़क पार कर रहा था। तब ट्रक को ओवरटेक करते हुए कार ने मृतक को टक्कर मारी। जिससे गंभीर घायल होने पर इलाज के दौरान उसकी चिकित्सालय में मौत हो गईं। अनुसंधान अधिकारी ने कार चालक को बचाने के लिए गलत तरीके से प्रकरण दर्ज होने के करीब साढे तीन माह तक उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। जब तक न्यायालय ने अनुसंधान अधिकारी को आदेश नहीं दिया। विशिष्ठ न्यायाधीश पीयूष चौधरी ने आरोप सांराश के दौरान आरोपी बिटूसिंह को पर्याप्त मात्रा में सबूत अभिलेख पर उपलब्ध नही होने से उस पर लगाये गये आरोपों को निरस्त कर हटाते हुए उसके विरुद्ध कार्यवाही यहीं समाप्त की। वहीं अजा – अजजा न्यायालय जालोर के विशिष्ट न्यायाधीश पीयुष चौधरी ने अनुसंधान अधिकारी द्वारा गलत अनुसंधान कर एक निर्दोष व्यक्ति ट्रक चालक को आरोपी बनाकर कार चालक को बचाते हुए गलत तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र पेश करने पर एक लोकसेवक अनुसंधान अधिकारी डीवाईएसपी रूपसिंह इंदा व एसपी जालोर के विरुद्ध समुचित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए इस आदेश की एक प्रति मुख्य सचिव गृह विभाग राजस्थान सरकार जयपुर व पुलिस महानिदेशक जयपुर को भेजकर कार्यवाही पालना रिपोर्ट 6 सितम्बर 2023 तक न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये। पुलिस द्वारा गलत अनुसंधान कर एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर एक लोकसेवक द्वारा अपने पद के अनुरूप कार्य नहीं कर न्यायालय में आरोप पत्र लापरवाही पूर्वक तैयार कर प्रस्तुत किया गया। जिस पर विशिष्ट न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी प्रकट करते हुए ऐसे अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर उच्चाधिकारियों को आगामी तारीख पेशी तक कार्यवाही से अवगत करवाने को लेकर आदेश की प्रति भेजी गई।

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उक्त आदेश से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस अपनी तफ्तीश में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को फंसाकर आरोप पत्र न्यायालय में पेश कर देते है। यदि न्यायालय बारीकी से आरोप पत्र पर गौर नहीं करे तो निर्दोष व्यक्ति को पुलिस फंसा सकती है।

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