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जालोरराजनीति

तीन साल के अंतराल के बाद कांग्रेस ने भंवरलाल मेघवाल को जालोर जिलाध्यक्ष की सौंपी कमान, संसदीय क्षेत्र से पांच नेताओं को प्रदेश की टीम में किया शामिल

जालोर. वर्ष 2020 में कांग्रेस पार्टी में मचे घमासान के दौरान जिला स्तरीय कमेटियां भंग कर दी गई थी, उसके करीब तीन साल बाद पुनः जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई। सोमवार देर रात को की गई इस घोषणा में जालोर जिले के कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कमान भंवरलाल मेघवाल को सौंपी गई है। यह जालोर में लंबे समय से सम्भवतया पहली बार है जब किसी अनुसूचित जाति वर्ग के नेता को जिलाध्यक्ष का दायित्व दिया गया है।

जालोर जिले के कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कमान भंवरलाल मेघवाल को सौंपी गई

भंवरलाल मेघवाल इससे पहले आहोर के प्रधान रह चुके है। साथ ही एक बार जिला परिषद सदस्य, सेवादल जिलाध्यक्ष व आहोर काँग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष पद पर रह चुके है। इनका नाम दौड़ में पूर्व से शामिल था। भंवरलाल के जिलाध्यक्ष बनने से जालोर में पार्टी कितनी मजबूत होगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन यह तय है कि इससे जालोर विधानसभा क्षेत्र से उनकी दावेदारी थम जाएगी।

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जालोर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से पांच नेता प्रदेश की टीम में

जालोर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से इस बार पांच नेताओं को प्रदेश की टीम में शामिल किया गया है। इसमें सिरोही जिले के आबूरोड की यूआईटी के पूर्व चेयरमैन हरीश चौधरी को महासचिव बनाया गया है। साथ ही जालोर से पूर्व जिलाध्यक्ष व भीनमाल के पूर्व विधायक डॉ समरजीतसिंह व रानीवाड़ा के पूर्व विधायक रतन देवासी को कांग्रेस कमेटी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सिरोही के हरीश परिहार व जालोर के जगदीश चौधरी को प्रदेश सचिव बनाया गया है।

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सरकार बनाने के लिए कई प्रकार के हुए गठजोड़

यहां इतने समय से नेताओं में आपसी गुटबाजी चल रही थी, लेकिन बीते दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं प्रदेश सह प्रभारी के दौरे के बाद सभी नेताओं ने एकजुट होना मुनासिब समझा। इसलिए अंदरूनी गठजोड़ भी हुए है। जिस कारण डॉ समरजीतसिंह व रतन देवासी ने जिलाध्यक्ष की भूमिका लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विधानसभा क्षेत्रों में इनकी दावेदारी अब भी मजबूत है।

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क्या सवाराम पटेल की दावेदारी अब भी मजबूत?

कुछ महीनों से जिलाध्यक्ष की दौड़ में सवाराम पटेल का नाम प्रबल था, क्योंकि जिले के दस ब्लॉक में से एक भी पटेल नहीं होने के कारण सहज अंदाजा लगाया जा रहा था कि शायद जिलाध्यक्ष की कमान इन्हें मिल जाये, लेकिन अब भंवरलाल मेघवाल के जिलाध्यक्ष बनने से वापस कयास शुरू हो गए है कि पार्टी क्या सवाराम पटेल को तीसरी बार मैदान में उतारकर भरोसा जता सकती है। हालांकि आहोर से इस बार दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। कुछ लोग पुखराज पाराशर के चुनाव लड़ने के पक्ष में है तो कुछ अन्य के समर्थन में भी है। यहां से पिछले दिनों लालसिंह धानपुर, लादूराम चौधरी, सरोज चौधरी, मन्सा चौधरी, खीमाराम चौधरी, आमसिंह परिहार, उमसिंह, प्रदीपसिंह चौहान समेत ने दावेदारी पेश कर रखी है।

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